राष्ट्रीय पुस्तक मेला – लखनऊ
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर 108 साहित्यकार सम्मानित
राष्ट्रीय पुस्तक मेले में गूंजा हिंदी गौरव का जयघोष
रिपोर्ट : ज्योतिर्मय यादव, लखनऊ
लखनऊ। राजधानी बालरामपुर गार्डन,लखनऊ का राष्ट्रीय पुस्तक मेला (22th) इस बार हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यिक इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय बन गया। पूरे प्रांगण में हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और गौरव का वातावरण गूंज उठा।
भव्य समारोह में एक ही मंच पर 108 साहित्यकारों, कवियों, लेखकों व रचनाकारों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह दृश्य न केवल साहित्य-जगत के लिए प्रेरणास्रोत बना बल्कि हिंदी भाषा के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व को भी रेखांकित करता रहा।
इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्देश्य था हिंदी भाषा को नई ऊर्जा देना, साहित्यकारों को उचित पहचान प्रदान करना और युवा पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ना।
यह कार्यक्रम माधवी फाउंडेशन, लखनऊ एवं विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में तथा निखिल पब्लिकेशन, आगरा के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
🎤 मंचासीन अतिथि गण
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डॉ. एल.पी. गुर्जर लखनवी – अध्यक्ष – उत्कृष्ट लेखन सम्मान
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डॉ. राम नरेश – मुख्य अतिथि – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. अरुणा दुबे – अति विशिष्ट अतिथि – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. मिथिलेश दीक्षित – संयोजक – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री मनोहर कुमार सिन्हा – विशिष्ट अतिथि – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. पी.एन. यादव – संयोजक – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. हरिशंकर मिश्रा – संयोजक – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री मोहन मुरारी शर्मा – अध्यक्ष, विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट
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डॉ. विजय शंकर दीक्षित ‘आशु’ – मंच संचालन – हिंदी गौरव सम्मान
🏅 विशेष अलंकरण
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हिंदी गौरव सम्मान, प्रदेश गौरव सम्मान ,राष्ट्र गौरव सम्मान ,श्री शक्ति सम्मान ,शिक्षा रत्न सम्मान ,योग श्री सम्मान ,साहित्य धरोहर सम्मान ,उत्कृष्ट लेखन सम्मान ,हिंदी सेवा सम्मान ,फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी सम्मान, उत्कृष्ट मंच संचालन व सज्जा सम्मान ,बेस्ट डिस्प्ले सम्मान
✍️ सम्मानित साहित्यकार और उनके अलंकरण
डॉ. स्टालिनि राय निगम ‘शिरीं’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री आशिष आनंद आर्य ‘हितैषी’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री प्रेम श्रीवास्तव ‘कन्हई’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती अंशुमा दुबे – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती रेखुमा शर्मा – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती अलका प्रभात – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री हरिश्चंद्र चौहान – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती माधुरी माहेश्वरी – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. अशोक आनंदी – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. नरेंद्र संग्राम – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री हरिसिंह शारदा ‘हरि’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री कृष्णा आर्य – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती सुमन शुक्ला ‘रूप’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री चंद्रपाल सिंह चंद – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री अंजन बहादुर श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री सुरेश चंद्र दुबे – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. फरासियस – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. ज्योतिर्मय यादव – बेस्ट फोटोग्राफी सम्मान
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श्री अम्बरेश कुमार श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री अम्बेडकर कुमार – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री मुल्ला खालिद कलहंस ‘पथिक’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री दौलत राम पुष्कर – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री राम विलास सिंह ‘रान’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री अनिल कुमार वर्मा – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती शशि कला सिन्हा – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. रेखा त्रिवेदी – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री रमेश चंद्र श्रीवास्तव ‘रक्षी’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री शिशुपाल मिश्रा – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. नवलकिशोर – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. क्रांतिन कुमार सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. रश्मि श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री अशोक कुमार चौधरी – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री विजय प्रसाद त्रिपाठी – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती अनिता गुप्ता – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री आशीष कुलकर्णी – साहित्य धरोहर सम्मान
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प्रो. नीतू अग्रवाल – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. सुरभि सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. प्रकाश पांडे – हिंदी गौरव सम्मान
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पं. चंद्र कुमार तिवारी – ज्योतिष भूषण सम्मान
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श्री चंद्रभान ‘चंद’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री राम प्रसाद वर्मा ‘सरस’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री संजीव सक्सेना – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री निखिल नारायण दुबे ‘निखिल’ – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री देवेंद्र कुमार – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. कृष्ण कुमार मिश्रा – हिंदी गौरव सम्मान
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मौलाना नसीर अहमद नसीर – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री पंकज दीक्षित – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री गोरी सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री हेम सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. हरिवर्धन प्रशांत – राष्ट्र गौरव सम्मान
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कु. प्रीति – राष्ट्र गौरव सम्मान
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श्री हरीश कुमार – प्रदेश गौरव सम्मान
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श्री मदन मोहन सिंह – Best Indie Author 2025 (Religious Nonfiction)
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डॉ. विवेक वाजपेयी – Best Indie Author 2025 (Nonfiction)
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डॉ. देवी व्रता सिंह बैस – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री शिव मोहन सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. रमेश चंद्र जी – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री अनीक कुमार श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री देवेंद्र सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. धीरेंद्र श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. छमा राय – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. सुमन यादव – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. जेबा खान – श्री शक्ति सम्मान
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कवयित्री नीतु सिंह चौहान – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री गिरीश चंद्र मुदगल – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. साधना द्विवेदी – राष्ट्र गौरव सम्मान
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डॉ. जीनल सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. एन.सी. मिश्रा – श्री शक्ति सम्मान
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डॉ. भारती गौधवानी – श्री शक्ति सम्मान
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डॉ. राजीव रंजन तिवारी – उत्कृष्ट लेखन सम्मान
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डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह – हिंदी सेवा सम्मान
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डॉ. सपना सिंह – हिंदी सेवा सम्मान
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डॉ. राजेन्द्र कुमार – हिंदी सेवा सम्मान
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श्री विकास मिश्र – हिंदी गौरव सम्मान
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श्रीमती अर्शना – हिंदी गौरव सम्मान
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कु. सृष्टि शर्मा – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री संदीप सक्सेना – श्री साज सज्जा सम्मान
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श्री सुशील वाजपेयी – उत्कृष्ट मंच सज्जा सम्मान
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श्री अमित गिहार – फोटोग्राफी सम्मान
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श्री अरविन्द मिश्रा – वीडियोग्राफी सम्मान
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श्री कमलेश कुमार शुक्ला – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री भगवती प्रसाद – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री कृष्णा रघुवंशी – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री प्रशांत महोबियाजी – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री गगन नाम ‘गगन’ – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. नीना कुमारी – शिक्षा रत्न सम्मान
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राजकुमारी गुर्जर – शिक्षा रत्न सम्मान
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डॉ. पटेल दुबेहित – शिक्षा रत्न सम्मान
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श्रीमती रमा गुर्जर – शिक्षा रत्न सम्मान
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इंजी. रामस्वरूप विवेकवर्ती ‘सरल’ – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. रामसरन भारती – हिंदी गौरव सम्मान
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योगाचार्य दीप्ति भूषण – योग श्री सम्मान
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श्रीमती रिया राय – हिंदी गौरव सम्मान
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डॉ. ऋतु सिंह – हिंदी गौरव सम्मान
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श्री अशोक किरकिरे – उत्कृष्ट मंच संचालन सम्मान
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श्री शिव सिंह बघेल – हिंदी गौरव सम्मान
सम्मान समारोह के दौरान जब एक-एक करके साहित्यकारों को मंच पर बुलाया गया, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वरिष्ठ रचनाकारों से लेकर युवा प्रतिभाओं तक, सभी ने अपने-अपने सम्मान को हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पित किया। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि हिंदी भाषा की ऊर्जा और उसकी व्यापकता का उत्सव है। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हुए इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि हिंदी न केवल हमारी मातृभाषा है, बल्कि हमारी पहचान और संस्कारों की आत्मा भी है।


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