भारत का एआई युग शुरू: 22 भाषाओं में काम करेगा स्वदेशी मॉडल ‘परम-2’
रिपोर्ट: ज्योतिर्मय यादव
नई दिल्ली। विश्व स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण आयोजन में दुनिया भर के 22 राष्ट्राध्यक्षों, नवाचार क्षेत्र के अग्रणी प्रतिनिधियों और एआई तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी हो रही है। यह वैश्विक एआई समिट नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है, जहां भविष्य की तकनीकी रणनीतियों पर व्यापक चर्चा हो रही है।
इस अवसर पर भारत ने अपना स्वदेशी बहुभाषी एआई मॉडल ‘परम-2’ प्रस्तुत किया, जिसे भारतीय भाषाओं, स्थानीय जरूरतों और सामाजिक संदर्भों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह मॉडल लगभग 22 भारतीय भाषाओं में संवाद करने में सक्षम है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक सेवाओं में डिजिटल पहुंच मजबूत होने की उम्मीद है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, परम-2 न केवल सामान्य प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम है बल्कि कोडिंग, गणितीय विश्लेषण और तार्किक समस्याओं को हल करने जैसे जटिल कार्य भी कर सकता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि डेवलपर्स और स्टार्टअप अपनी जरूरतों के अनुसार इसे फाइन-ट्यून कर सकें, जिससे देश के नवाचार तंत्र को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय डेटा और भाषाई विविधता पर आधारित यह पहल भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता यानी “सॉवरेन एआई” की दिशा में मजबूत करेगी और विदेशी एआई प्रणालियों पर निर्भरता घटाने में मददगार साबित होगी।
नई दिल्ली,भारत मंडपम में आयोजित यह समिट केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की दिशा तय करने वाला मंच बनकर उभरा है—जहां स्वदेशी एआई अब हर भाषा और हर नागरिक तक पहुंचने की तैयारी में है।






