गुरुवार, 4 सितंबर 2025

कॉर्न मून

 

🌕 आसमान में लालिमा बिखेरता ‘कॉर्न मून’ : 

7 सितंबर को लगेगा चंद्रग्रहण

रिपोर्ट: ज्योतिर्मय यादव, फ़ोटोग्राफ़र एवं फ़िल्ममेकर, लखनऊ



    PHOTO-JYOTIRMAY YADAV



🔭 खगोलीय घटना का महत्व

7 सितंबर की रात आसमान में पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर उसकी छाया चंद्रमा पर डाल देगी। जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की अम्ब्रल (Umbra) छाया में प्रवेश करता है, तब वह लालिमा से युक्त ब्लड मून बन जाता है।

यह लालिमा पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाले रेली स्कैटरिंग (Rayleigh Scattering) और रिफ्रैक्शन के कारण बनती है।

  • वायुमंडल नीली और बैंगनी रोशनी को अधिक बिखेर देता है।

  • लाल और नारंगी तरंगदैर्घ्य लंबी दूरी तय करते हुए चंद्रमा तक पहुँचते हैं।

  • यही कारण है कि पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा ताम्रवर्ण या रक्तिम दिखाई देता है।

  • 🌌 कब और कहाँ दिखाई देगा?

  • भारत सहित एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में यह चंद्रग्रहण साफ़ दिखाई देगा।

    • तारीख: रविवार, 7 सितंबर 2025

    • समय: रात 8:30 बजे से आरंभ, मध्य चरण लगभग 10:15 बजे, समापन करीब 12:00 बजे (IST के अनुसार)


🌌 वैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • ग्रहण का प्रकार: यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।

  • स्थिति: सूर्य → पृथ्वी → चंद्रमा एक सीध में होंगे।

  • अवधि: लगभग 3 घंटे तक विभिन्न चरणों में यह ग्रहण चलेगा।

  • दृश्यता: एशिया, यूरोप, अफ्रीका के बड़े हिस्से और भारत में स्पष्ट दिखाई देगा।

चंद्रग्रहण केवल एक ऑप्टिकल (प्रकाश आधारित) घटना है। इसमें कोई हानिकारक विकिरण (Radiation) नहीं निकलता। यही कारण है कि इसे देखने से आंखों पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता


❌ मिथक बनाम विज्ञान

भारत समेत कई जगहों पर यह धारणा प्रचलित है कि चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखना हानिकारक है
👉 लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह एक पूर्णत: सुरक्षित घटना है।

🪐 वैज्ञानिक तथ्य:

  1. सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण में अंतर

    • सूर्यग्रहण के समय सूर्य की तीव्र पराबैंगनी (UV) किरणें सीधी आंखों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

    • चंद्रग्रहण में चंद्रमा केवल सूर्य की परावर्तित रोशनी दिखाता है, और वह भी पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आती है। इसमें कोई हानिकारक किरणें नहीं होतीं

  2. नंगी आंखों से सुरक्षित

    • चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखना 100% सुरक्षित है।

    • दूरबीन, टेलीस्कोप या कैमरे से देखने पर भी आंखों पर कोई खतरा नहीं होता।

  3. खगोल विज्ञानियों की राय

    • NASA और ISRO जैसे संस्थान स्पष्ट कर चुके हैं कि चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखने में कोई जोखिम नहीं है।

    • यह तो एस्ट्रोफ़ोटोग्राफ़ी और अध्ययन के लिए बेहतरीन अवसर है।


📸 फ़ोटोग्राफ़रों के लिए विशेष सुझाव

  • यह घटना एस्ट्रोफ़ोटोग्राफ़ी और नाइट फ़ोटोग्राफ़ी के शौकीनों के लिए शानदार अवसर है।

    1. कैमरा और लेंस

    • DSLR या Mirrorless कैमरा उपयुक्त।

    • Telephoto लेंस (200mm–600mm) चंद्रमा के क्लोज़-अप के लिए।

    • Wide Angle लेंस (14mm–35mm) foreground (मंदिर, पेड़, इमारत) के साथ क्रिएटिव शॉट के लिए।

    2. कैमरा सेटिंग्स

    • Mode: Manual (M)

    • Shutter Speed: 1/125 सेकंड से शुरू करें; ग्रहण के गहरे चरणों में 1/2 – 2 सेकंड तक।

    • Aperture: f/8 – f/11 बेहतर sharpness के लिए।

    • ISO: 100–400; आवश्यकता होने पर 800–1600 तक।

    • Focus: Manual पर रखें और चाँद पर zoom करके फोकस पक्का करें।

    3. अनिवार्य उपकरण

    • मजबूत ट्राइपॉड।

    • Remote shutter या टाइमर (2s/10s) ताकि कैमरा shake न हो।

    • RAW फॉर्मेट में शूट करना बेहतर।

    4. क्रिएटिव आइडिया

    • चंद्रमा को किसी स्मारक या प्राकृतिक दृश्य के साथ फ्रेम करें।

    • Timelapse बनाकर पूरे ग्रहण की कहानी दिखाएँ।

    • Multiple exposure से चंद्रमा के अलग-अलग चरण एक ही फ्रेम में कैद करें।

    ग्रहण के गहरे चरणों (Totality) में रोशनी बेहद कम हो जाएगी, इसलिए लॉन्ग एक्सपोज़र (1–2 सेकंड) ज़रूरी है।

  • ग्रहण के अलग-अलग चरणों को डॉक्यूमेंट करने के लिए Time-Lapse सेटअप वैज्ञानिक और कलात्मक दोनों दृष्टियों से उपयोगी रहेगा।


🌾 सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

सितंबर की पूर्णिमा को पश्चिमी और भारतीय परंपराओं में अलग-अलग नाम और महत्व दिए गए हैं।

🌍 पश्चिमी नाम/परंपरा🇮🇳 भारतीय परंपरा/महत्व
हार्वेस्ट मून 🌾 – इक्वीनॉक्स (22 सितंबर) के पास की पूर्णिमा।भाद्रपद पूर्णिमा (भादो पूर्णिमा) – स्नान, दान और व्रत का महत्व।
वाइन मून 🍷 – यूरोप में अंगूर की कटाई से जुड़ा।अनंत चतुर्दशी के अगले दिन – गणेश विसर्जन के बाद की पावन पूर्णिमा।
बार्ली मून 🌾 – जौ की फसल कटाई का प्रतीक।पितृ पक्ष का आरंभ – पूर्वजों को तर्पण व श्राद्ध।
फ्रूट मून 🍎 – फलों की प्रचुरता का मौसम।कृषि दृष्टि से – धान व खरीफ़ फसल पकने की शुरुआत।

इस प्रकार, जहाँ पश्चिम में यह पूर्णिमा फसल और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक रही है, वहीं भारत में इसे धार्मिक आस्था, पूर्वजों की स्मृति और कृषि चक्र से जोड़ा गया है।


7 सितंबर 2025 का कॉर्न मून चंद्रग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि विज्ञान, संस्कृति और कला का अनोखा संगम है।

यह मान्यता कि इसे नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए, पूरी तरह मिथक है।
दरअसल, यह वह क्षण है जब इंसान अपनी आंखों से ब्रह्मांड की सुंदरता और विज्ञान की सच्चाई को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकता है।

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