10 अक्टूबर को लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में होगा भव्य सम्मान समारोह, साहित्यिक योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर होंगे सम्मानित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन के पूर्व विशेष सचिव एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम नारायण यादव को उनके विशिष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट (रजि.) के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री मोहन मुरारी शर्मा ने इस सम्मान की घोषणा की है। आगामी 10 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुस्तक मेले के मुख्य मंच पर यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट एवं निखिल प्रकाशन समूह, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
प्रशासनिक सेवा से साहित्य साधना तक का प्रेरक सफर
प्रशासनिक सेवा में विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन जैसे महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए प्रेम नारायण यादव ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनकी साहित्यिक यात्रा संवेदना, चिंतन, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है। गीत, गजल, अध्यात्म और लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत जैसे विविध विषयों पर उनकी लेखनी ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।
उनकी रचनाओं में जीवन के सुख-दुख, प्रेम, मानवीय संवेदनाएं, प्रकृति की सुंदरता और आध्यात्मिक चिंतन सहज रूप से अभिव्यक्त होते हैं। साहित्य के प्रति उनकी निरंतर साधना इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मकता किसी पद या आयु की मोहताज नहीं होती, बल्कि जीवन के अनुभवों के साथ और अधिक परिपक्व होती जाती है।
पाँच प्रमुख कृतियां हैं साहित्यिक पहचान का आधार
प्रेम नारायण यादव की पांच चर्चित कृतियां उनके साहित्यिक व्यक्तित्व के विविध आयामों को सामने लाती हैं।
‘इसलिए गीत गाता हूँ मैं’ गीत-गजल संग्रह में जीवन के संघर्षों, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति है। वहीं ‘क्या रंग रोशनी है..’ में प्रकृति, अंतर्मन की उजास और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का सुंदर चित्रण मिलता है।
उनका एक अन्य गीत-गजल संग्रह ‘दिल की कलम से’ मानवीय भावनाओं और जीवन के अनुभवों को सहज एवं प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत करता है। आध्यात्मिक चिंतन के क्षेत्र में उनकी कृति ‘श्रीमद् भगवद्गीता – अमृतम् महत्’ विशेष उल्लेखनीय है, जिसमें गीता के गूढ़ संदेशों को सरल, रोचक और नवीन दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
इसके अतिरिक्त ‘ख़याल गंज नख़लऊ’ लखनऊ के ऐतिहासिक वैभव, नवाबी संस्कृति, नजाकत और तहजीब को साहित्यिक अभिव्यक्ति प्रदान करती है। यह कृति शहर की सांस्कृतिक पहचान और उसकी समृद्ध विरासत से पाठकों को जोड़ने का माध्यम बनती है।
राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन में जुटेंगे साहित्यकार
विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री मोहन मुरारी शर्मा के अनुसार, सम्मान समारोह का निर्धारित समय दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक रहेगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुस्तक मेले के मंच पर देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकारों, प्रकाशकों और साहित्यप्रेमियों के शामिल होने की अपेक्षा है।
‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से प्रेम नारायण यादव को विभूषित किया जाना उनके साहित्यिक अवदान के प्रति सम्मान और हिंदी भाषा-साहित्य की समृद्ध परंपरा के प्रति गौरव का अवसर होगा। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और पुस्तकों के प्रति अनुराग रखने वाले लोगों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।
आयोजकों ने साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, पुस्तक प्रेमियों और आम नागरिकों से इस साहित्यिक आयोजन में सहभागिता करने की अपील की है।

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