शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

प्रशासनिक सेवा से साहित्य साधना तक का प्रेरक सफर

 

10 अक्टूबर को लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में होगा भव्य सम्मान समारोह, साहित्यिक योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर होंगे सम्मानित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन के पूर्व विशेष सचिव एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम नारायण यादव को उनके विशिष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट (रजि.) के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री मोहन मुरारी शर्मा ने इस सम्मान की घोषणा की है। आगामी 10 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुस्तक मेले के मुख्य मंच पर यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट एवं निखिल प्रकाशन समूह, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।

प्रशासनिक सेवा से साहित्य साधना तक का प्रेरक सफर

प्रशासनिक सेवा में विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन जैसे महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए प्रेम नारायण यादव ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनकी साहित्यिक यात्रा संवेदना, चिंतन, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है। गीत, गजल, अध्यात्म और लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत जैसे विविध विषयों पर उनकी लेखनी ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।

उनकी रचनाओं में जीवन के सुख-दुख, प्रेम, मानवीय संवेदनाएं, प्रकृति की सुंदरता और आध्यात्मिक चिंतन सहज रूप से अभिव्यक्त होते हैं। साहित्य के प्रति उनकी निरंतर साधना इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मकता किसी पद या आयु की मोहताज नहीं होती, बल्कि जीवन के अनुभवों के साथ और अधिक परिपक्व होती जाती है।

पाँच प्रमुख कृतियां हैं साहित्यिक पहचान का आधार

प्रेम नारायण यादव की पांच चर्चित कृतियां उनके साहित्यिक व्यक्तित्व के विविध आयामों को सामने लाती हैं।

‘इसलिए गीत गाता हूँ मैं’ गीत-गजल संग्रह में जीवन के संघर्षों, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति है। वहीं ‘क्या रंग रोशनी है..’ में प्रकृति, अंतर्मन की उजास और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का सुंदर चित्रण मिलता है।

उनका एक अन्य गीत-गजल संग्रह ‘दिल की कलम से’ मानवीय भावनाओं और जीवन के अनुभवों को सहज एवं प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत करता है। आध्यात्मिक चिंतन के क्षेत्र में उनकी कृति ‘श्रीमद् भगवद्गीता – अमृतम् महत्’ विशेष उल्लेखनीय है, जिसमें गीता के गूढ़ संदेशों को सरल, रोचक और नवीन दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

इसके अतिरिक्त ‘ख़याल गंज नख़लऊ’ लखनऊ के ऐतिहासिक वैभव, नवाबी संस्कृति, नजाकत और तहजीब को साहित्यिक अभिव्यक्ति प्रदान करती है। यह कृति शहर की सांस्कृतिक पहचान और उसकी समृद्ध विरासत से पाठकों को जोड़ने का माध्यम बनती है।

राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन में जुटेंगे साहित्यकार

विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री मोहन मुरारी शर्मा के अनुसार, सम्मान समारोह का निर्धारित समय दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक रहेगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुस्तक मेले के मंच पर देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकारों, प्रकाशकों और साहित्यप्रेमियों के शामिल होने की अपेक्षा है।

‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से प्रेम नारायण यादव को विभूषित किया जाना उनके साहित्यिक अवदान के प्रति सम्मान और हिंदी भाषा-साहित्य की समृद्ध परंपरा के प्रति गौरव का अवसर होगा। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और पुस्तकों के प्रति अनुराग रखने वाले लोगों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।

आयोजकों ने साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, पुस्तक प्रेमियों और आम नागरिकों से इस साहित्यिक आयोजन में सहभागिता करने की अपील की है।

वैश्विक स्तर पर शोध उत्कृष्टता की निरंतर पहचान

 

AKTU के डॉ. अनुज कुमार शर्मा ने विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में लगातार छठी बार बनाई जगह


स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की वैश्विक सूची में मिली पहचान, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान से बढ़ाया विश्वविद्यालय का गौरव

लखनऊ। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU), लखनऊ के सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुज कुमार शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा 7 अक्टूबर 2026 को जारी World’s Top 2% Scientists List 2026 में उन्हें स्थान मिला है। इसके साथ ही डॉ. शर्मा ने वर्ष 2021 से लगातार छठी बार इस प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में अपनी जगह बनाई है। उनकी यह उपलब्धि अनुसंधान, नवाचार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान को रेखांकित करती है। इसी सूची में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) के प्रो. अरुण कुमार तिवारी भी शामिल हैं।

वैश्विक स्तर पर शोध उत्कृष्टता की निरंतर पहचान

विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में लगातार छह वर्षों तक स्थान प्राप्त करना डॉ. शर्मा की दीर्घकालिक शोध प्रतिबद्धता और अकादमिक सक्रियता को दर्शाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जारी सूची में भारत के 6,239 वैज्ञानिक शामिल थे, जबकि वर्ष 2026 की सूची में देश के 3,858 वैज्ञानिकों को स्थान मिला। ऐसे प्रतिस्पर्धी वैश्विक अकादमिक परिदृश्य में डॉ. शर्मा की निरंतर उपस्थिति उनके शोध कार्यों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को रेखांकित करती है।

अकादमिक नेतृत्व और नवाचार में भी निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ. अनुज कुमार शर्मा वर्तमान में एकेटीयू में डीन, एकेडमिक्स तथा मेकाट्रॉनिक्स विभागाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके साथ ही वे नवाचार, सामाजिक उद्यमिता, अनुसंधान और औद्योगिक परामर्श से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वह एकेटीयू फाउंडेशन के अंतर्गत कलाम सेंटर फॉर इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन ऑफ स्टार्टअप के निदेशक के रूप में भी कार्यरत हैं। उनके प्रयासों का उद्देश्य शोध को व्यावहारिक उपयोग, तकनीकी विकास और स्टार्टअप नवाचार से जोड़ना है।

डॉ. शर्मा ने वर्ष 2017 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम), धनबाद से मशीनिंग विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में मेटल कटिंग, इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज मशीनिंग, मशीनिंग ट्राइबोलॉजी, नैनो-कटिंग फ्लुइड्स, सॉफ्ट रोबोटिक्स, बायो-इंस्पायर्ड रोबोटिक्स और मेकाट्रॉनिक्स सिस्टम शामिल हैं।

135 से अधिक शोध पत्र और छह पेटेंट

अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में डॉ. शर्मा का योगदान उल्लेखनीय है। उनके नाम 135 से अधिक SCIE एवं Scopus इंडेक्स्ड शोध पत्र और छह पेटेंट दर्ज हैं। उन्होंने प्रधान अन्वेषक के रूप में छह शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया है, जिनकी कुल राशि चार करोड़ रुपये से अधिक है।

इन शोध परियोजनाओं को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के SERB, उत्तर प्रदेश सरकार की काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CST) तथा अन्य संस्थानों से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धियां उनके शोध कार्यों की व्यापकता और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में योगदान को दर्शाती हैं।

अकादमिक उत्कृष्टता के लिए मिल चुके हैं कई सम्मान

डॉ. शर्मा को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा अकादमिक एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, एकेटीयू ने उन्हें वर्ष 2020 और 2025 में बेस्ट टीचर अवार्ड प्रदान किया। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने सुरक्षा एवं बचाव से संबंधित उपयोगी उत्पादों के विकास में भी योगदान दिया।

एकेटीयू के लिए गौरव, युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणा

वर्ष 2021 से लगातार विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान प्राप्त करना डॉ. अनुज कुमार शर्मा की शोध के प्रति प्रतिबद्धता, अकादमिक उत्कृष्टता और नवाचार की दिशा में निरंतर प्रयासों का परिचायक है। उनकी यह उपलब्धि एकेटीयू के लिए गौरव का विषय है। साथ ही, यह युवा शोधार्थियों, विद्यार्थियों और शिक्षकों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करती है।


प्रशासनिक सेवा से साहित्य साधना तक का प्रेरक सफर

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