शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

नई खोज

 🕰️ बिना घड़ी के समय जान सकोगे अब!



 रिपोर्ट – ज्योतिर्मय यादव, लखनऊ


वैज्ञानिकों ने समय मापने का ऐसा अनोखा तरीका खोज निकाला है जिसमें किसी घड़ी, सुई या शुरुआत के बिंदु की ज़रूरत ही नहीं है। यह खोज क्वांटम भौतिकी की दुनिया से आई है — जहाँ परमाणु और इलेक्ट्रॉन सामान्य नियमों से अलग, बेहद सूक्ष्म और रहस्यमय ढंग से काम करते हैं।

स्वीडन की Uppsala University के वैज्ञानिकों ने यह दिखाया कि समय को मापने के लिए हम अब परमाणुओं के भीतर बनने वाले प्राकृतिक पैटर्न्स का उपयोग कर सकते हैं। यह तकनीक भविष्य में क्वांटम विज्ञान और सटीक मापन तकनीकों में क्रांति ला सकती है।


⚛️ क्वांटम दुनिया की नई घड़ी

परमाणु के भीतर मौजूद इलेक्ट्रॉन जब लेज़र किरणों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं, तो वे एक खास अवस्था में पहुँचते हैं जिसे राइडबर्ग स्टेट (Rydberg State) कहा जाता है।
इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन एक निश्चित रास्ते पर नहीं चलते, बल्कि वे लहरों की तरह फैलते हैं और आपस में मिलकर जटिल तरंग पैटर्न (wave patterns) बनाते हैं।

इन पैटर्न्स को राइडबर्ग वेव पैकेट्स (Rydberg Wave Packets) कहा जाता है। जब ये तरंगें आपस में टकराती हैं, तो वे एक खास इंटरफेरेंस पैटर्न बनाती हैं — और यही पैटर्न समय की पहचान बन जाता है।


⏱️ कैसे मापा जाता है समय बिना घड़ी के

इस नई तकनीक में वैज्ञानिकों को किसी “शुरुआती बिंदु” की ज़रूरत नहीं होती।
वे सिर्फ़ इलेक्ट्रॉनों द्वारा बनाए गए पैटर्न को देखकर ही यह बता सकते हैं कि वे समय के किस क्षण पर हैं।
हर पैटर्न एक अनोखे “फिंगरप्रिंट” की तरह काम करता है, जो बताता है कि यह पल कौन-सा है।

यह कुछ ऐसा है जैसे कोई गाना चल रहा हो और आप सिर्फ़ कुछ सुर सुनकर बता दें कि गाने का कौन-सा हिस्सा चल रहा है — बिना यह जाने कि गाना कब शुरू हुआ था।


🔬 प्रयोग और परिणाम

वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग में हीलियम परमाणुओं को लेज़र पल्स से ऊर्जा दी और फिर उन परमाणुओं के अंदर बने तरंग पैटर्न्स को रिकॉर्ड किया।
उन्होंने पाया कि ये पैटर्न्स बिल्कुल वैसे ही बने, जैसे उनके क्वांटम सिद्धांत (theoretical models) में अनुमान लगाया गया था।

इससे साबित हुआ कि समय को इन पैटर्न्स के ज़रिए सटीक रूप से मापा जा सकता है — बिना किसी पारंपरिक घड़ी के।


💡 भविष्य के लिए क्या मायने हैं?

यह खोज खासतौर पर क्वांटम प्रयोगों में बहुत उपयोगी होगी, जहाँ घटनाएँ कुछ ट्रिलियनवें सेकंड में घटित होती हैं।
इतने छोटे समय को मापना पारंपरिक तरीकों से लगभग असंभव होता है।

यह तकनीक भविष्य में क्वांटम कंप्यूटरों, अति-सटीक वैज्ञानिक मापों, और नैनो टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है।


📚 स्रोत:

Berholts, Marta, et al. "Quantum watch and its intrinsic proof of accuracy."
Physical Review Research 4.4 (2022): 043041.

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