सोमवार, 29 सितंबर 2025

नई खोज

 📰 “समय का क्रिस्टल” अब आँखों से दिखेगा! भौतिक विज्ञान में नई क्रांति



📍 रिपोर्ट: ज्योतिर्मय यादव,लखनऊ

29.Sep.2025

भौतिक विज्ञानी अब तक केवल सिद्धांतों और जटिल प्रयोगों में दिखने वाले टाइम क्रिस्टल को हकीकत में देखने योग्य बना चुके हैं।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो, बोल्डर की टीम ने पहली बार ऐसा टाइम क्रिस्टल तैयार किया है, जो तरल क्रिस्टल (Liquid Crystal) से बना है—यानी वही पदार्थ जो आपकी LCD स्क्रीन में भी मौजूद होता है।

🔬 इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने तरल क्रिस्टल को विशेष रंग परत (dye coating) वाले काँच की प्लेटों के बीच रखा। जब उस पर खास तरह की रोशनी डाली गई, तो डाई ने अपनी दिशा बदली और तरल क्रिस्टल पर दबाव बनाया। इससे अणुओं में लहराती हुई धारियाँ (rippling patterns) बनने लगीं, जो समय के साथ दोहराती रहीं।यही लगातार समय में दोहराव (time repetition) इसे एक सच्चा टाइम क्रिस्टल बनाता है।पहली बार यह घटना नंगी आँखों और माइक्रोस्कोप से सीधे देखी जा सकती है—यह इसे अब तक के सभी टाइम क्रिस्टल प्रयोगों से अलग और खास बनाती है।

भविष्य की संभावनाएँ:

उन्नत ऑप्टिक्स और टेलीकॉम तकनीक

नकली वस्तुओं को रोकने वाली सुरक्षा तकनीक (anti-counterfeiting)

सुरक्षित रैंडम नंबर जनरेशन

👉 टाइम क्रिस्टल का विचार 2012 में आया था और तब इसे असंभव माना गया था। लेकिन 2016 में पहला प्रमाण मिला और अब यह नया संस्करण विज्ञान की दुनिया को और भी रोमांचक बना रहा है।

भारत ने पाकिस्तान को 5 विकेट से दुबई में पीटा

 भारत ने पाकिस्तान को  दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में 5 विकेट से पीटते हुए जीत हासिल की


रिपोर्ट - ज्योतिर्मय यादव, लखनऊ 

एशिया कप 2025 के ऐतिहासिक फाइनल में टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर 9वीं बार एशिया का चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी चुनी और कुलदीप यादव की शानदार गेंदबाज़ी की बदौलत पाकिस्तान की पूरी टीम 146 रन पर सिमट गई। जवाब में भारतीय बल्लेबाज़ों ने धैर्य और दम दिखाते हुए लक्ष्य का पीछा किया। तिलक वर्मा बने असली हीरो, जिन्होंने 69 रन की बेहतरीन पारी खेली। वहीं शिवम दुबे (33) और संजू सैमसन (33) ने मिलकर पारी को मज़बूत किया और आखिरी ओवर में टीम इंडिया,पाकिस्तान की टीम को 5 विकेट से पीटते हुए भारत  को जीत दिला दी।

#AsiaCup2025 #INDvsPAK #TeamIndia #TilakVarma #IndiaChampion 

शनिवार, 13 सितंबर 2025

108 साहित्यकार सम्मानित

 

राष्ट्रीय पुस्तक मेला – लखनऊ

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर 108 साहित्यकार सम्मानित

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में गूंजा हिंदी गौरव का जयघोष


रिपोर्ट : ज्योतिर्मय यादव, लखनऊ

लखनऊ। राजधानी बालरामपुर गार्डन,लखनऊ का राष्ट्रीय पुस्तक मेला (22th) इस बार हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यिक इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय बन गया। पूरे प्रांगण में हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और गौरव का वातावरण गूंज उठा।
भव्य समारोह में एक ही मंच पर 108 साहित्यकारों, कवियों, लेखकों व रचनाकारों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह दृश्य न केवल साहित्य-जगत के लिए प्रेरणास्रोत बना बल्कि हिंदी भाषा के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व को भी रेखांकित करता रहा।
इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्देश्य था हिंदी भाषा को नई ऊर्जा देना, साहित्यकारों को उचित पहचान प्रदान करना और युवा पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ना।
यह कार्यक्रम माधवी फाउंडेशन, लखनऊ एवं विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में तथा निखिल पब्लिकेशन, आगरा के सहयोग से सम्पन्न हुआ।

🎤 मंचासीन अतिथि गण

  1. डॉ. एल.पी. गुर्जर लखनवी – अध्यक्ष – उत्कृष्ट लेखन सम्मान

  2. डॉ. राम नरेश – मुख्य अतिथि – हिंदी गौरव सम्मान

  3. डॉ. अरुणा दुबे – अति विशिष्ट अतिथि – हिंदी गौरव सम्मान

  4. डॉ. मिथिलेश दीक्षित – संयोजक – हिंदी गौरव सम्मान

  5. श्री मनोहर कुमार सिन्हा – विशिष्ट अतिथि – हिंदी गौरव सम्मान

  6. डॉ. पी.एन. यादव – संयोजक – हिंदी गौरव सम्मान

  7. डॉ. हरिशंकर मिश्रा – संयोजक – हिंदी गौरव सम्मान

  8. श्री मोहन मुरारी शर्मा – अध्यक्ष, विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट

  9. डॉ. विजय शंकर दीक्षित ‘आशु’ – मंच संचालन – हिंदी गौरव सम्मान


🏅 विशेष अलंकरण

  • हिंदी गौरव सम्मान, प्रदेश गौरव सम्मान ,राष्ट्र गौरव सम्मान ,श्री शक्ति सम्मान ,शिक्षा रत्न सम्मान ,योग श्री सम्मान ,साहित्य धरोहर सम्मान ,उत्कृष्ट लेखन सम्मान ,हिंदी सेवा सम्मान ,फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी सम्मान, उत्कृष्ट मंच संचालन व सज्जा सम्मान ,बेस्ट डिस्प्ले सम्मान


✍️ सम्मानित साहित्यकार और उनके अलंकरण

  • डॉ. स्टालिनि राय निगम ‘शिरीं’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री आशिष आनंद आर्य ‘हितैषी’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री प्रेम श्रीवास्तव ‘कन्हई’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती अंशुमा दुबे – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती रेखुमा शर्मा – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती अलका प्रभात – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री हरिश्चंद्र चौहान – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती माधुरी माहेश्वरी – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. अशोक आनंदी – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. नरेंद्र संग्राम – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री हरिसिंह शारदा ‘हरि’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री कृष्णा आर्य – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती सुमन शुक्ला ‘रूप’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री चंद्रपाल सिंह चंद – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री अंजन बहादुर श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री सुरेश चंद्र दुबे – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. फरासियस – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. ज्योतिर्मय यादव – बेस्ट फोटोग्राफी सम्मान

  • श्री अम्बरेश कुमार श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री अम्बेडकर कुमार – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री मुल्ला खालिद कलहंस ‘पथिक’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री दौलत राम पुष्कर – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री राम विलास सिंह ‘रान’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री अनिल कुमार वर्मा – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती शशि कला सिन्हा – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. रेखा त्रिवेदी – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री रमेश चंद्र श्रीवास्तव ‘रक्षी’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री शिशुपाल मिश्रा – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. नवलकिशोर – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. क्रांतिन कुमार सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. रश्मि श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री अशोक कुमार चौधरी – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री विजय प्रसाद त्रिपाठी – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती अनिता गुप्ता – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री आशीष कुलकर्णी – साहित्य धरोहर सम्मान

  • प्रो. नीतू अग्रवाल – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. सुरभि सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. प्रकाश पांडे – हिंदी गौरव सम्मान

  • पं. चंद्र कुमार तिवारी – ज्योतिष भूषण सम्मान

  • श्री चंद्रभान ‘चंद’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री राम प्रसाद वर्मा ‘सरस’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री संजीव सक्सेना – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री निखिल नारायण दुबे ‘निखिल’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री देवेंद्र कुमार – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. कृष्ण कुमार मिश्रा – हिंदी गौरव सम्मान

  • मौलाना नसीर अहमद नसीर – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री पंकज दीक्षित – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री गोरी सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री हेम सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. हरिवर्धन प्रशांत – राष्ट्र गौरव सम्मान

  • कु. प्रीति – राष्ट्र गौरव सम्मान

  • श्री हरीश कुमार – प्रदेश गौरव सम्मान

  • श्री मदन मोहन सिंह – Best Indie Author 2025 (Religious Nonfiction)

  • डॉ. विवेक वाजपेयी – Best Indie Author 2025 (Nonfiction)

  • डॉ. देवी व्रता सिंह बैस – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री शिव मोहन सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. रमेश चंद्र जी – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री अनीक कुमार श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री देवेंद्र सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. धीरेंद्र श्रीवास्तव – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. छमा राय – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. सुमन यादव – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. जेबा खान – श्री शक्ति सम्मान

  • कवयित्री नीतु सिंह चौहान – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री गिरीश चंद्र मुदगल – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. साधना द्विवेदी – राष्ट्र गौरव सम्मान

  • डॉ. जीनल सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. एन.सी. मिश्रा – श्री शक्ति सम्मान

  • डॉ. भारती गौधवानी – श्री शक्ति सम्मान

  • डॉ. राजीव रंजन तिवारी – उत्कृष्ट लेखन सम्मान

  • डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह – हिंदी सेवा सम्मान

  • डॉ. सपना सिंह – हिंदी सेवा सम्मान

  • डॉ. राजेन्द्र कुमार – हिंदी सेवा सम्मान

  • श्री विकास मिश्र – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्रीमती अर्शना – हिंदी गौरव सम्मान

  • कु. सृष्टि शर्मा – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री संदीप सक्सेना – श्री साज सज्जा सम्मान

  • श्री सुशील वाजपेयी – उत्कृष्ट मंच सज्जा सम्मान

  • श्री अमित गिहार – फोटोग्राफी सम्मान

  • श्री अरविन्द मिश्रा – वीडियोग्राफी सम्मान

  • श्री कमलेश कुमार शुक्ला – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री भगवती प्रसाद – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री कृष्णा रघुवंशी – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री प्रशांत महोबियाजी – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री गगन नाम ‘गगन’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. नीना कुमारी – शिक्षा रत्न सम्मान

  • राजकुमारी गुर्जर – शिक्षा रत्न सम्मान

  • डॉ. पटेल दुबेहित – शिक्षा रत्न सम्मान

  • श्रीमती रमा गुर्जर – शिक्षा रत्न सम्मान

  • इंजी. रामस्वरूप विवेकवर्ती ‘सरल’ – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. रामसरन भारती – हिंदी गौरव सम्मान

  • योगाचार्य दीप्ति भूषण – योग श्री सम्मान

  • श्रीमती रिया राय – हिंदी गौरव सम्मान

  • डॉ. ऋतु सिंह – हिंदी गौरव सम्मान

  • श्री अशोक किरकिरे – उत्कृष्ट मंच संचालन सम्मान

  • श्री शिव सिंह बघेल – हिंदी गौरव सम्मान

  • सम्मान समारोह के दौरान जब एक-एक करके साहित्यकारों को मंच पर बुलाया गया, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वरिष्ठ रचनाकारों से लेकर युवा प्रतिभाओं तक, सभी ने अपने-अपने सम्मान को हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पित किया। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि हिंदी भाषा की ऊर्जा और उसकी व्यापकता का उत्सव है। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हुए इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि हिंदी न केवल हमारी मातृभाषा है, बल्कि हमारी पहचान और संस्कारों की आत्मा भी है।

सोमवार, 8 सितंबर 2025

BloodMoon

 🌕✨ Lucknow Witnesses the Moon’s Fiery Transformation! 🔴🌌



लखनऊ की रात ने कल एक अनोखा नज़ारा देखा — जब चमकता चाँद धीरे-धीरे पृथ्वी की छाया में समा गया और अपनी रजत आभा (silver glow) को छोड़कर एक रहस्यमयी लालिमा (blood red hue) ओढ़ ली। यह दृश्य था पूर्ण चंद्रग्रहण का, जिसे आम बोलचाल में Blood Moon कहा जाता है।

आसमान में यह परिवर्तन मानो किसी सिनेमाई फ्रेम की तरह घटित हुआ —पहले चाँद पर हल्की-सी छाया,फिर धीरे-धीरे उसका अंधेरे में ढलना,और अंततः उसका रक्तिम आभा से दमक उठना।

🌌  हमारा आसमान सिर्फ़ तारों और चाँद का नहीं, बल्कि अनगिनत कहानियों और अद्भुत घटनाओं का भी घर है।

📸 Photo & Concept: Jyotirmay Yadav

#everyoneシ゚ #VisualStorytelling #lunareclipse2025 #lucknow #indian #India



गुरुवार, 4 सितंबर 2025

कॉर्न मून

 

🌕 आसमान में लालिमा बिखेरता ‘कॉर्न मून’ : 

7 सितंबर को लगेगा चंद्रग्रहण

रिपोर्ट: ज्योतिर्मय यादव, फ़ोटोग्राफ़र एवं फ़िल्ममेकर, लखनऊ



    PHOTO-JYOTIRMAY YADAV



🔭 खगोलीय घटना का महत्व

7 सितंबर की रात आसमान में पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर उसकी छाया चंद्रमा पर डाल देगी। जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की अम्ब्रल (Umbra) छाया में प्रवेश करता है, तब वह लालिमा से युक्त ब्लड मून बन जाता है।

यह लालिमा पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाले रेली स्कैटरिंग (Rayleigh Scattering) और रिफ्रैक्शन के कारण बनती है।

  • वायुमंडल नीली और बैंगनी रोशनी को अधिक बिखेर देता है।

  • लाल और नारंगी तरंगदैर्घ्य लंबी दूरी तय करते हुए चंद्रमा तक पहुँचते हैं।

  • यही कारण है कि पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा ताम्रवर्ण या रक्तिम दिखाई देता है।

  • 🌌 कब और कहाँ दिखाई देगा?

  • भारत सहित एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में यह चंद्रग्रहण साफ़ दिखाई देगा।

    • तारीख: रविवार, 7 सितंबर 2025

    • समय: रात 8:30 बजे से आरंभ, मध्य चरण लगभग 10:15 बजे, समापन करीब 12:00 बजे (IST के अनुसार)


🌌 वैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • ग्रहण का प्रकार: यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।

  • स्थिति: सूर्य → पृथ्वी → चंद्रमा एक सीध में होंगे।

  • अवधि: लगभग 3 घंटे तक विभिन्न चरणों में यह ग्रहण चलेगा।

  • दृश्यता: एशिया, यूरोप, अफ्रीका के बड़े हिस्से और भारत में स्पष्ट दिखाई देगा।

चंद्रग्रहण केवल एक ऑप्टिकल (प्रकाश आधारित) घटना है। इसमें कोई हानिकारक विकिरण (Radiation) नहीं निकलता। यही कारण है कि इसे देखने से आंखों पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता


❌ मिथक बनाम विज्ञान

भारत समेत कई जगहों पर यह धारणा प्रचलित है कि चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखना हानिकारक है
👉 लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह एक पूर्णत: सुरक्षित घटना है।

🪐 वैज्ञानिक तथ्य:

  1. सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण में अंतर

    • सूर्यग्रहण के समय सूर्य की तीव्र पराबैंगनी (UV) किरणें सीधी आंखों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

    • चंद्रग्रहण में चंद्रमा केवल सूर्य की परावर्तित रोशनी दिखाता है, और वह भी पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आती है। इसमें कोई हानिकारक किरणें नहीं होतीं

  2. नंगी आंखों से सुरक्षित

    • चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखना 100% सुरक्षित है।

    • दूरबीन, टेलीस्कोप या कैमरे से देखने पर भी आंखों पर कोई खतरा नहीं होता।

  3. खगोल विज्ञानियों की राय

    • NASA और ISRO जैसे संस्थान स्पष्ट कर चुके हैं कि चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखने में कोई जोखिम नहीं है।

    • यह तो एस्ट्रोफ़ोटोग्राफ़ी और अध्ययन के लिए बेहतरीन अवसर है।


📸 फ़ोटोग्राफ़रों के लिए विशेष सुझाव

  • यह घटना एस्ट्रोफ़ोटोग्राफ़ी और नाइट फ़ोटोग्राफ़ी के शौकीनों के लिए शानदार अवसर है।

    1. कैमरा और लेंस

    • DSLR या Mirrorless कैमरा उपयुक्त।

    • Telephoto लेंस (200mm–600mm) चंद्रमा के क्लोज़-अप के लिए।

    • Wide Angle लेंस (14mm–35mm) foreground (मंदिर, पेड़, इमारत) के साथ क्रिएटिव शॉट के लिए।

    2. कैमरा सेटिंग्स

    • Mode: Manual (M)

    • Shutter Speed: 1/125 सेकंड से शुरू करें; ग्रहण के गहरे चरणों में 1/2 – 2 सेकंड तक।

    • Aperture: f/8 – f/11 बेहतर sharpness के लिए।

    • ISO: 100–400; आवश्यकता होने पर 800–1600 तक।

    • Focus: Manual पर रखें और चाँद पर zoom करके फोकस पक्का करें।

    3. अनिवार्य उपकरण

    • मजबूत ट्राइपॉड।

    • Remote shutter या टाइमर (2s/10s) ताकि कैमरा shake न हो।

    • RAW फॉर्मेट में शूट करना बेहतर।

    4. क्रिएटिव आइडिया

    • चंद्रमा को किसी स्मारक या प्राकृतिक दृश्य के साथ फ्रेम करें।

    • Timelapse बनाकर पूरे ग्रहण की कहानी दिखाएँ।

    • Multiple exposure से चंद्रमा के अलग-अलग चरण एक ही फ्रेम में कैद करें।

    ग्रहण के गहरे चरणों (Totality) में रोशनी बेहद कम हो जाएगी, इसलिए लॉन्ग एक्सपोज़र (1–2 सेकंड) ज़रूरी है।

  • ग्रहण के अलग-अलग चरणों को डॉक्यूमेंट करने के लिए Time-Lapse सेटअप वैज्ञानिक और कलात्मक दोनों दृष्टियों से उपयोगी रहेगा।


🌾 सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

सितंबर की पूर्णिमा को पश्चिमी और भारतीय परंपराओं में अलग-अलग नाम और महत्व दिए गए हैं।

🌍 पश्चिमी नाम/परंपरा🇮🇳 भारतीय परंपरा/महत्व
हार्वेस्ट मून 🌾 – इक्वीनॉक्स (22 सितंबर) के पास की पूर्णिमा।भाद्रपद पूर्णिमा (भादो पूर्णिमा) – स्नान, दान और व्रत का महत्व।
वाइन मून 🍷 – यूरोप में अंगूर की कटाई से जुड़ा।अनंत चतुर्दशी के अगले दिन – गणेश विसर्जन के बाद की पावन पूर्णिमा।
बार्ली मून 🌾 – जौ की फसल कटाई का प्रतीक।पितृ पक्ष का आरंभ – पूर्वजों को तर्पण व श्राद्ध।
फ्रूट मून 🍎 – फलों की प्रचुरता का मौसम।कृषि दृष्टि से – धान व खरीफ़ फसल पकने की शुरुआत।

इस प्रकार, जहाँ पश्चिम में यह पूर्णिमा फसल और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक रही है, वहीं भारत में इसे धार्मिक आस्था, पूर्वजों की स्मृति और कृषि चक्र से जोड़ा गया है।


7 सितंबर 2025 का कॉर्न मून चंद्रग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि विज्ञान, संस्कृति और कला का अनोखा संगम है।

यह मान्यता कि इसे नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए, पूरी तरह मिथक है।
दरअसल, यह वह क्षण है जब इंसान अपनी आंखों से ब्रह्मांड की सुंदरता और विज्ञान की सच्चाई को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकता है।

गुरुवार, 28 अगस्त 2025

मूवी रिव्य

 🎬 महावतार नरसिंह 


समीक्षक – ज्योतिर्मय यादव, फोटोग्राफर एवं फिल्ममेकर, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

   भारतीय सिनेमा में पौराणिक कथाओं पर आधारित एनिमेटेड फिल्में अभी भी कम बनती हैं। इसी बीच निर्देशक अश्विन कुमार की महावतार नरसिंह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को आधुनिक दर्शकों तक पहुँचाने का साहसिक प्रयास है।

फिल्म केवल धार्मिक कथा नहीं सुनाती, बल्कि अहंकार, लोभ, वासना और ईर्ष्या जैसे मानवीय दोषों को उजागर करती है और दिखाती है कि अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।

कहानी और प्रस्तुति

शुरुआत थोड़ी धीमी जरूर लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती है, यह दर्शकों को अपने साथ जोड़ लेती है।अश्विन कुमार ने नरसिंह अवतार की कथा को सरल और भावनात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया है, जिससे यह न केवल बच्चों बल्कि युवाओं और वयस्कों के लिए भी प्रेरणादायक बन जाती है।

🎥 निर्देशन और विज़न

अश्विन कुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्टोरीटेलिंग है।उन्होंने भारत के प्राचीन महाकाव्यों को आज की संवेदनाओं से जोड़ते हुए यह साबित किया है कि पौराणिक कथाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।निर्देशक की दृष्टि और भावनात्मक गहराई इस फिल्म को साधारण से असाधारण बनाती है।

🖥 एनीमेशन और तकनीकी पहलू

फिल्म का एनीमेशन अच्छा है, लेकिन विश्वस्तरीय मानकों तक पहुँचने के लिए और सुधार की गुंजाइश है।किरदारों के हावभाव, युद्ध के दृश्य और गानों की कोरियोग्राफी थोड़ी और बारीकी से गढ़ी जाती तो यह फिल्म एक नायाब मास्टरपीस बन सकती थी।इसके बावजूद, सीमित संसाधनों में निर्देशक ने जो विज़ुअल संसार रचा है, वह दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रहता है।

🎭 भावनाएँ और संदेश

फिल्म यह संदेश देती है कि —

बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः अच्छाई ही जीतती है।समय का महत्व, आत्मबल, और ईश्वर की कृपा जीवन को सार्थक बनाते हैं।होलिका दहन जैसे त्योहारों का महत्व भी फिल्म बड़ी खूबसूरती से समझाती है।

⚔ क्लाइमैक्स

नरसिंह का अवतार और राक्षस के साथ अंतिम युद्ध फिल्म का सबसे रोमांचक हिस्सा है।यह दृश्य श्रद्धा और उत्साह से भरा है, और दर्शकों को एक यादगार अनुभव देता है।

🎯 क्यों देखें

पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति में रुचि रखते हैं।एनिमेशन फिल्मों के शौकीन हैं।बच्चों को सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ना चाहते हैं।तो महावतार नरसिंह आपके लिए बेहतरीन विकल्प है।कुछ तकनीकी सीमाओं के बावजूद यह फिल्म भारतीय एनिमेशन सिनेमा में एक साहसिक और प्रशंसनीय कदम है।निर्देशक अश्विन कुमार ने यह साबित किया है कि आने वाले समय में भारतीय एनिमेशन हॉलीवुड को भी चुनौती दे सकता है।

👉 कुल मिलाकर, महावतार नरसिंह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आस्था, रोमांच और कला का संगम है।

रेटिंग – ⭐⭐⭐⭐ (4/5)

(मजबूत कहानी, भावनात्मक अपील और प्रेरक संदेश; तकनीकी सुधार की थोड़ी गुंजाइश)


बुधवार, 13 अगस्त 2025

जैव-विविधता

 प्रकृति से जुड़ाव 60% घटा

 बच्चों की परवरिश और शहरों की डिजाइन बदलना ही समाधान


REPORT-JYOTIRMAY YADAV

लखनऊ। एक चौंकाने वाले अध्ययन ने खुलासा किया है कि 1800 के बाद से मनुष्य का प्रकृति से जुड़ाव 60% से अधिक घट चुका है। यह गिरावट सिर्फ हमारे जीवनशैली में ही नहीं, बल्कि हमारी भाषा और संस्कृति में भी दिखाई देती है—साहित्य में “नदी,” “काई” और “कलियाँ” जैसे शब्दों का इस्तेमाल लगातार कम होता गया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ डर्बी के प्रोफेसर माइल्स रिचर्डसन के नेतृत्व में किए गए इस शोध को हाल ही में अर्थ पत्रिका में प्रकाशित किया गया। अध्ययन में शहरीकरण, जैव-विविधता में कमी, और पारिवारिक आदतों में बदलाव के ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश की गई कि किस तरह प्रकृति हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से दूर होती चली गई।

📉 “अनुभव का विलुप्त होना”

अध्ययन में इस प्रक्रिया को Extinction of Experience नाम दिया गया है—यानी वह स्थिति जब पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों का प्रकृति से जुड़ाव धीरे-धीरे मिटता चला जाता है। शोध का अनुमान है कि यदि अगले 25 वर्षों में बड़े पैमाने पर बदलाव नहीं किए गए, तो यह गिरावट जारी रहेगी।

🌱 समाधान – बचपन से प्रकृति और हरित शहर

शोध में बताया गया कि सबसे असरदार उपाय है—बचपन से बच्चों को प्रकृति से जोड़ना और शहरों में बड़े पैमाने पर हरियाली लाना।

  • ग्रीन स्पेस बढ़ाने की ज़रूरत: मौजूदा नीतियाँ 30% हरित क्षेत्र बढ़ाने को महत्व देती हैं, लेकिन रिचर्डसन के मॉडल के अनुसार यह बढ़ोतरी कम से कम 10 गुना होनी चाहिए।

  • जैव-विविध शहरी वातावरण: शहरों में सिर्फ पार्क नहीं, बल्कि पेड़ों, पौधों, पक्षियों और जलस्रोतों से भरपूर इलाकों की आवश्यकता है।

  • भाषा और संस्कृति का जुड़ाव: किताबों और कहानियों में प्रकृति-शब्दों का फिर से बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह स्थायी बदलाव है या सिर्फ एक रुझान, यह अभी स्पष्ट नहीं।

🧠 मानसिक स्वास्थ्य में अल्पकालिक लाभ

कम अवधि के जुड़ाव कार्यक्रम, जैसे “नेचर वॉक” या “ग्रीन थेरेपी,” मानसिक स्वास्थ्य को तो बेहतर बनाते हैं, लेकिन लंबे समय के जुड़ाव के लिए ये पर्याप्त नहीं हैं।

⚠️ चुनौती नीतियों से बड़ी

शोध के अनुसार, मौजूदा पर्यावरणीय नीतियों की तुलना में कहीं बड़े और साहसिक कदम उठाने की आवश्यकता है। यह सिर्फ पर्यावरण का मामला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, शैक्षिक और शहरी योजना का भी मुद्दा है।

प्रो. रिचर्डसन का कहना है

“हम बच्चों में प्रकृति के प्रति स्वाभाविक आकर्षण को बनाए रखें, और हमारे शहर ऐसे हों जहां जैव-विविधता सांस ले सके, तभी आने वाली पीढ़ियाँ प्रकृति के साथ अपना बंधन दोबारा मजबूत कर पाएंगी।”